सुबह हुई तो वह अकेला था। बिल्कुल अकेला। चारों तरफ खून से लथपथ ज़मीन, टूटे हुए हथियार और उसके दोस्तों के शव।
अकेलेपन ने उसे डरा दिया। उसे लगा, "मैं कैसे जीवित रहूँगा? यहाँ से निकलूँगा कैसे?"
सेना के एक विशेष बल के कमांडर थे। उनकी 12 सदस्यीय टीम को दुश्मन के अड्डे को नष्ट करने का महत्वपूर्ण मिशन दिया गया था। लेकिन मिशन के दौरान ही उन पर घात लगाकर हमला कर दिया गया।
दुश्मन ने उसे भी मृत समझ लिया था। लेकिन विक्रादित्य जीवित था - बुरी तरह घायल, उसका बायाँ हाथ टूटा हुआ था, पसलियों में चोट थी, लेकिन उसकी सांसें अभी बाकी थीं।
अस्पताल में आँख खुली तो सबने उसे "लोन सर्वाइवर" कहकर बुलाया। वह अकेला था जो उस नरसंहार से बच निकला था।
विक्रादित्य गिर गया। लेकिन इससे पहले कि दुश्मन उसे खत्म करता, हेलीकॉप्टरों की आवाज़ आई - उसकी सेना आ गई थी। उन्होंने विक्रादित्य को बेहोशी की हालत में बचाया।