19वीं सदी के अमेरिकी जंगलों में, एक अनुभवी गाइड ह्यू ग्लास (लियोनार्डो डिकैप्रियो) अपनी टीम के साथ फर का व्यापार करता है। एक भयानक भालू के हमले में वह बुरी तरह घायल हो जाता है। टीम का सरगना, फिट्ज़गेराल्ड (टॉम हार्डी), उसे मरा हुआ समझकर अकेला छोड़ जाता है, और उसके बेटे (जो आधा मूल अमेरिकी है) की हत्या कर देता है। लेकिन ग्लास मरता नहीं – वह बदला लेने के लिए बर्फीली धरती पर रेंगता हुआ, नदियाँ पार करता हुआ, कच्चा मांस खाता हुआ, सैकड़ों मील का सफर तय करता है।

यह फिल्म उन लोगों के लिए है जो रोमांटिक कॉमेडी या मसाला एक्शन छोड़कर कुछ कच्चा, असली और तीखा देखना चाहते हैं। यह पश्चिमी सिनेमा की सबसे कठिन फिल्मों में से एक है – बर्फ, खून और चीख़ों के बीच मानवता का सवाल।

यह फिल्म देखना एक तपस्या है – जितनी दर्दनाक, उतनी ही खूबसूरत। एलेजांद्रो गोंजालेज इन्यारितु ने प्रकृति को ही एक किरदार बना दिया है। ठंड, बर्फ, पहाड़, नदी – सब कुछ ग्लास के शरीर और आत्मा को चीरता है। डिकैप्रियो का अभिनय कोई अभिनय नहीं, बल्कि एक अवतार है। एक ही डायलॉग में पूरा जज़्बात भर देते हैं वह – “ I ain’t afraid to die anymore. I’ve done it already. ” टॉम हार्डी ने क्रूरता को इतने सहज ढंग से जीया है कि आप उससे सच में नफरत करने लगते हैं।